छत्तीसगढ़
हाईकोर्ट ने उठाए सवाल: रायपुर के सूदखोर तोमर बंधुओं पर दर्ज 7 FIR पर स्पष्टीकरण मांगा
Shantanu Roy
19 Aug 2025 10:02 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में सूदखोरी और आर्गेनाइज क्राइम के मामले में फरार चल रहे कुख्यात तोमर बंधु—वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर—को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह से यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिरकार एक ही आरोपियों के खिलाफ एक साथ सात एफआईआर दर्ज करने की क्या आवश्यकता थी और यह कार्रवाई किस आधार पर की गई। हाईकोर्ट ने इस पर विस्तृत जवाब मांगा है और एसएसपी को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ दो सप्ताह के भीतर अदालत में जवाब दाखिल करें।
फरार चल रहे तोमर बंधु, गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
याचिकाकर्ता वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर पर रायपुर के तेलीबांधा और पुरानी बस्ती थानों में सूदखोरी और एक्सटॉर्शन (उगाही) के मामले दर्ज हैं। पुलिस ने उनके ठिकानों पर दबिश दी थी, जहां से भारी मात्रा में कैश, चेक और जमीनों के दस्तावेज बरामद हुए। जांच के दौरान पुलिस को कई और अहम सबूत मिले, जिनके आधार पर यह मामला संगठित अपराध (ऑर्गेनाइज क्राइम) से जुड़ा हुआ माना गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ अलग-अलग 7 FIR दर्ज की और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि, गिरफ्तारी के डर से दोनों आरोपी पिछले दो महीने से फरार चल रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों भाइयों ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए।
पुलिस पर दबाव में कार्रवाई का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने दबाव और दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की है। आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर दोनों भाइयों को संगठित अपराध जैसे गंभीर केस में फंसाने की कोशिश की है।
वकील ने दलील दी कि पुलिस ने एक ही तरह के आरोपों पर सात एफआईआर दर्ज कर दी, जो कानूनन सही नहीं है। जांच निष्पक्ष नहीं है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में की जा रही है। तोमर बंधु को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताकर गलत छवि बनाई जा रही है। इन्हीं तर्कों के आधार पर वकील ने अग्रिम जमानत देने की मांग की, ताकि दोनों भाई न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।
हाईकोर्ट ने तलब की केस डायरी
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए केस डायरी तलब की थी। मंगलवार को जब सुनवाई हुई, तब अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस को यह बताना होगा कि किस कानूनी आधार पर सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। हाईकोर्ट ने एसएसपी रायपुर से कहा कि वे व्यक्तिगत शपथपत्र देकर दो सप्ताह में इसका स्पष्टीकरण दें। कोर्ट के रुख से यह साफ हो गया है कि पुलिस की कार्रवाई पर न्यायालय गंभीरता से सवाल उठा रहा है।
पुलिस के अनुसार कैसे चलता था सूदखोरी का नेटवर्क
पुलिस की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तोमर बंधु लंबे समय से रायपुर में सूदखोरी और उगाही के धंधे में सक्रिय थे।
रोहित तोमर ने अपनी पत्नी भावना तोमर के नाम से एक ऑफिस खोला था।
इसी ऑफिस से सूदखोरी का पूरा कारोबार संचालित होता था।
लोगों को ऊंची ब्याज दर पर कर्ज दिया जाता था और समय पर रकम न लौटाने पर धमकी, मारपीट और संपत्ति कब्जाने तक की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क संगठित अपराध के तौर पर काम करता था, जिसमें कई स्थानीय लोग भी शामिल थे।
फरार आरोपियों पर इनाम घोषित
पुलिस ने पिछले दो महीनों से वीरेंद्र और रोहित तोमर की गिरफ्तारी के लिए कई जगह दबिश दी, लेकिन वे हाथ नहीं आए। दोनों आरोपी फरार हैं और पुलिस के अनुसार लगातार ठिकाने बदलकर बचने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए रायपुर पुलिस ने इनाम की घोषणा भी की है। साथ ही उनके खिलाफ जारी लुकआउट नोटिस और गिरफ्तारी वारंट भी प्रभावी हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती से बढ़ा तनाव
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब पुलिस प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह अदालत में ठोस आधार पेश करे। यदि पुलिस यह साबित करने में असफल रहती है कि सात एफआईआर दर्ज करने की वैधता क्यों थी, तो यह पूरा मामला उलझ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी एफआईआर एक ही घटना और आरोपों पर आधारित हैं, तो यह ‘मल्टीपल एफआईआर’ की श्रेणी में आता है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने कई मामलों में अवैध करार दिया है। लेकिन यदि हर एफआईआर अलग-अलग पीड़ितों और अलग-अलग लेन-देन से संबंधित है, तो पुलिस का पक्ष मजबूत हो सकता है।
बड़ा सवाल: क्या बच पाएंगे तोमर बंधु?
तोमर बंधुओं का आपराधिक रिकॉर्ड और सूदखोरी का कारोबार रायपुर पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। अब जबकि मामला हाईकोर्ट की निगरानी में है, पुलिस को अपने कदमों का कानूनी आधार मजबूत करना होगा। दूसरी ओर, तोमर बंधु इस कोशिश में हैं कि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाए और वे गिरफ्तारी से बच सकें। लेकिन पुलिस द्वारा बरामद कैश, चेक और जमीनों के दस्तावेज उनके खिलाफ गंभीर सबूत के तौर पर खड़े हैं।
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